मांगलिक दोष क्या है
मांगलिक या कुज दोष विवाह-मिलान में देखा जाने वाला योग है। इसका संबंध मंगल की ऊर्जा से जोड़ा जाता है, जिसे दांपत्य में तालमेल के संदर्भ में समझा जाता है।
परिहार (निरस्तीकरण)
शास्त्रों में कई स्थितियाँ बताई गई हैं जिनमें दोष कमज़ोर या निरस्त माना जाता है, जैसे मंगल का स्वराशि या उच्च में होना, या दोनों पक्षों का मांगलिक होना।
परिणाम को कैसे लें
मांगलिक होना कोई निर्णय नहीं, केवल एक संकेत है। विवाह का निर्णय दो लोगों की समझ, संवाद और परिस्थितियों पर निर्भर करता है; इस परिणाम को उसी संदर्भ में देखें।
कैसे उपयोग करें
- अपना जन्म विवरण भरें।
- लग्न, चंद्र और शुक्र से मंगल की स्थिति का परिणाम देखें।
- नीचे लागू होने वाले परिहार पढ़ें।
गणना की विधि: ग्रहों की स्थिति ओपन-सोर्स astronomy-engine लाइब्रेरी से निकाली जाती है और लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन राशिचक्र में बदली जाती है। जन्म स्थान से उस दिन का समय क्षेत्र और डेलाइट सेविंग देखकर समय को सार्वभौमिक समय में बदला जाता है, इसलिए विदेश में जन्मे लोग भी स्थानीय समय सीधे डाल सकते हैं। भाव लग्न से पूर्ण-राशि पद्धति में हैं और राहु-केतु मध्यम पात हैं। परिणाम आत्म-चिंतन और सीखने के लिए हैं; ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मांगलिक दोष से विवाह असफल होता है?
नहीं, ऐसा कोई निश्चित नियम नहीं है। बहुत से लोगों की कुंडली में यह योग होता है और परिहार भी आम हैं। इसे भय का कारण न बनाएँ।
क्या उम्र के साथ मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है?
कुछ परंपराओं में 28 वर्ष के बाद इसका प्रभाव कम माना जाता है, पर यह सर्वमान्य नियम नहीं है। अलग-अलग विद्वानों के मत भिन्न हैं।
दोनों मांगलिक हों तो क्या होता है?
पारंपरिक मत में जब दोनों पक्षों में मांगलिक योग हो तो दोष एक-दूसरे को संतुलित करता हुआ माना जाता है।
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