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अंक ज्योतिष (मूलांक-भाग्यांक)

भारतीय अंक ज्योतिष में जन्म दिन से मूलांक और पूरी जन्म तिथि से भाग्यांक निकाला जाता है। हर अंक का एक स्वामी ग्रह माना गया है।

मूलांक कैसे निकलता है

जन्म के दिन के अंकों को जोड़कर एक अंक तक लाया जाता है। जैसे 23 तारीख का मूलांक 2+3 = 5 होगा। इसे व्यक्ति के स्वभाव से जोड़ा जाता है।

भाग्यांक

पूरी जन्म तिथि (दिन, महीना, वर्ष) के सभी अंकों को जोड़कर एक अंक तक लाने से भाग्यांक मिलता है। इसे जीवन की दिशा से जोड़कर देखा जाता है।

अंक और ग्रह

1 सूर्य, 2 चंद्र, 3 गुरु, 4 राहु, 5 बुध, 6 शुक्र, 7 केतु, 8 शनि और 9 मंगल से जुड़ा माना जाता है। यह संबंध अंकों को वैदिक ग्रहों से जोड़ता है।

कैसे उपयोग करें

  1. जन्म तिथि भरें (नामांक के लिए नाम भी लिखें)।
  2. मूलांक, भाग्यांक और नामांक देखें।
  3. हर अंक की व्याख्या और स्वामी ग्रह पढ़ें।

गणना की विधि: ग्रहों की स्थिति ओपन-सोर्स astronomy-engine लाइब्रेरी से निकाली जाती है और लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन राशिचक्र में बदली जाती है। जन्म स्थान से उस दिन का समय क्षेत्र और डेलाइट सेविंग देखकर समय को सार्वभौमिक समय में बदला जाता है, इसलिए विदेश में जन्मे लोग भी स्थानीय समय सीधे डाल सकते हैं। भाव लग्न से पूर्ण-राशि पद्धति में हैं और राहु-केतु मध्यम पात हैं। परिणाम आत्म-चिंतन और सीखने के लिए हैं; ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मूलांक और भाग्यांक में क्या अंतर है?

मूलांक केवल जन्म के दिन से बनता है, जबकि भाग्यांक पूरी जन्म तिथि से। पहला स्वभाव से और दूसरा जीवन की दिशा से जोड़ा जाता है।

क्या नाम बदलने से भाग्य बदल जाता है?

इसका कोई प्रमाण नहीं है। नामांक को एक पारंपरिक संकेत के रूप में देखें; केवल इसी आधार पर बड़े निर्णय न लें।

क्या अंक ज्योतिष वैदिक ज्योतिष का भाग है?

यह एक अलग पर संबंधित परंपरा है। भारत में अंकों को नौ ग्रहों से जोड़कर पढ़ा जाता है, इसलिए दोनों साथ उपयोग होते हैं।

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