27 नक्षत्र क्या हैं
राशिचक्र के 360 अंशों को 27 बराबर भागों में बाँटा जाता है, हर भाग 13°20′ का होता है। हर नक्षत्र का अपना स्वामी ग्रह, देवता और प्रतीक है, जिनसे उसका स्वभाव समझा जाता है।
चरण और नामाक्षर
हर नक्षत्र के चार चरण होते हैं। परंपरा में चरण के अनुसार नाम का पहला अक्षर सुझाया जाता है, इसलिए नामकरण में जन्म नक्षत्र और चरण देखा जाता है।
नक्षत्र का उपयोग कहाँ होता है
विंशोत्तरी दशा का आरंभ, कुंडली मिलान के कूट और मुहूर्त चयन, तीनों में जन्म नक्षत्र आधार बनता है। इसलिए इसे सही जानना उपयोगी है।
कैसे उपयोग करें
- जन्म तिथि, समय और स्थान भरें।
- “गणना करें” दबाकर नक्षत्र और चरण देखें।
- नीचे स्वामी ग्रह, देवता, प्रतीक और गण की जानकारी पढ़ें।
गणना की विधि: ग्रहों की स्थिति ओपन-सोर्स astronomy-engine लाइब्रेरी से निकाली जाती है और लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन राशिचक्र में बदली जाती है। जन्म स्थान से उस दिन का समय क्षेत्र और डेलाइट सेविंग देखकर समय को सार्वभौमिक समय में बदला जाता है, इसलिए विदेश में जन्मे लोग भी स्थानीय समय सीधे डाल सकते हैं। भाव लग्न से पूर्ण-राशि पद्धति में हैं और राहु-केतु मध्यम पात हैं। परिणाम आत्म-चिंतन और सीखने के लिए हैं; ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
जन्म नक्षत्र और जन्म राशि में क्या संबंध है?
दोनों चंद्रमा की स्थिति से तय होते हैं। राशि 30° का भाग है और नक्षत्र 13°20′ का, इसलिए एक राशि में सवा दो नक्षत्र आते हैं।
क्या जन्म समय के बिना नक्षत्र पता चल सकता है?
चंद्रमा एक नक्षत्र में लगभग एक दिन रहता है। समय न हो तो उस दिन नक्षत्र बदलने पर दो संभावनाएँ हो सकती हैं, इसलिए समय देना बेहतर है।
क्या कुछ नक्षत्र अशुभ होते हैं?
परंपरा में कुछ नक्षत्रों (जैसे गंडमूल) के लिए शांति का उल्लेख है, पर कोई नक्षत्र अपने आप में अच्छा या बुरा नहीं है। पूरी कुंडली देखना ज़रूरी है।
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