दशा का आरंभ चंद्र नक्षत्र से
जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उसके स्वामी ग्रह से पहली दशा शुरू होती है। चंद्रमा उस नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे पहली दशा का शेष समय (दशा शेष) तय होता है।
महादशा और अंतर्दशा
बड़ी अवधि महादशा, उसके भीतर के भाग अंतर्दशा और उससे भी छोटे भाग प्रत्यंतर दशा कहलाते हैं। एक ही कुंडली में अलग-अलग दशाओं में अलग विषय प्रमुख माने जाते हैं।
तिथियों को कैसे पढ़ें
दशा की सीमाओं को कुछ दिनों के अंतर के साथ समझें। किसी घटना को एक निश्चित दिन से जोड़कर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है; दशा केवल समय के रुझान की ओर संकेत करती है।
कैसे उपयोग करें
- जन्म विवरण भरें (दूसरे टूल में भरा हो तो अपने आप दिखेगा)।
- ऊपर वर्तमान महादशा और अंतर्दशा दिखाई देगी।
- किसी भी अवधि पर क्लिक करके उसके भीतर की उप-दशाएँ खोलें।
गणना की विधि: ग्रहों की स्थिति ओपन-सोर्स astronomy-engine लाइब्रेरी से निकाली जाती है और लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन राशिचक्र में बदली जाती है। जन्म स्थान से उस दिन का समय क्षेत्र और डेलाइट सेविंग देखकर समय को सार्वभौमिक समय में बदला जाता है, इसलिए विदेश में जन्मे लोग भी स्थानीय समय सीधे डाल सकते हैं। भाव लग्न से पूर्ण-राशि पद्धति में हैं और राहु-केतु मध्यम पात हैं। परिणाम आत्म-चिंतन और सीखने के लिए हैं; ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
विंशोत्तरी दशा क्या है?
यह 120 वर्ष का ग्रह-चक्र है: केतु 7, शुक्र 20, सूर्य 6, चंद्र 10, मंगल 7, राहु 18, गुरु 16, शनि 19 और बुध 17 वर्ष, इसी क्रम में।
जन्म समय थोड़ा गलत हो तो क्या असर पड़ेगा?
कुछ मिनट का अंतर दशा की तिथियों को कुछ दिन या सप्ताह आगे-पीछे कर सकता है, विशेषकर जब चंद्रमा नक्षत्र की सीमा के पास हो।
क्या दशा से भविष्य निश्चित रूप से पता चलता है?
नहीं। दशा पारंपरिक रूप से समय के विषयों को समझने का तरीका है। इसे आत्म-चिंतन के लिए उपयोग करें, निश्चित भविष्यवाणी के रूप में नहीं।
पूरी कुंडली विस्तार से देखनी है?
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