काल सर्प योग क्या है
राहु को सर्प का मुख और केतु को पूँछ माना गया है। जब सातों ग्रह इन दोनों के बीच एक ही आधे भाग में हों, तो उसे काल सर्प योग कहते हैं। यह बृहत् पाराशर होरा शास्त्र जैसे प्राचीन ग्रंथों में नहीं है; बाद के ग्रंथों और आधुनिक ज्योतिष में इसकी चर्चा हुई, इसलिए विद्वानों के मत अलग हैं।
पूर्ण और आंशिक योग
यदि सातों ग्रह एक ओर हों तो पूर्ण योग। यदि केवल एक ग्रह अक्ष से बाहर हो तो अधिकतर ज्योतिषी इसे आंशिक और काफ़ी कमज़ोर मानते हैं। टूल बताता है कि कौन-सा ग्रह बाहर है।
12 प्रकार
लग्न से राहु जिस भाव में हो, उससे प्रकार तय होता है: अनंत (1), कुलिक (2), वासुकि (3), शंखपाल (4), पद्म (5), महापद्म (6), तक्षक (7), कर्कोटक (8), शंखचूड़ (9), घातक (10), विषधर (11) और शेषनाग (12)।
उपाय
शिव पूजा, रुद्राभिषेक, राहु-केतु के मंत्र और काल सर्प दोष निवारण पूजा पारंपरिक उपाय हैं। विदेश में रहने वाले परिवारों के लिए हमारे पंडित यह पूजा आपके नाम और गोत्र से ऑनलाइन करते हैं।
कैसे उपयोग करें
- अपना जन्म विवरण भरें।
- देखें कि योग पूर्ण है, आंशिक है या नहीं है।
- प्रकार पढ़ें और चाहें तो निवारण पूजा बुक करें।
गणना की विधि: ग्रहों की स्थिति ओपन-सोर्स astronomy-engine लाइब्रेरी से निकाली जाती है और लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश से निरयन राशिचक्र में बदली जाती है। जन्म स्थान से उस दिन का समय क्षेत्र और डेलाइट सेविंग देखकर समय को सार्वभौमिक समय में बदला जाता है, इसलिए विदेश में जन्मे लोग भी स्थानीय समय सीधे डाल सकते हैं। भाव लग्न से पूर्ण-राशि पद्धति में हैं और राहु-केतु मध्यम पात हैं। परिणाम आत्म-चिंतन और सीखने के लिए हैं; ये चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह नहीं हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या काल सर्प दोष शास्त्रों में है?
प्राचीन ग्रंथों में नहीं, बाद के ग्रंथों और आधुनिक प्रयोग में है। इसीलिए इसकी शक्ति पर मत भिन्न हैं।
क्या यह जीवन भर रहता है?
यह जन्म कुंडली का योग है, पर इसका असर अधिकतर राहु या केतु की दशा में अधिक और परंपरा के अनुसार 42 से 48 वर्ष के बाद कम माना जाता है।
क्या सही जन्म समय ज़रूरी है?
हाँ या नहीं का परिणाम समय से बहुत कम बदलता है, पर प्रकार लग्न पर निर्भर है, इसलिए उसके लिए सही समय चाहिए।
पूरी कुंडली विस्तार से देखनी है?
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